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Kya hote hai 16 sanskar, हिंदू धर्म के अनुसार 16 संस्कार

हिंदू धर्म के अनुसार 16 संस्कार 

हिंदू धर्म में बचपन से लेकर मृत्यु तक कुल 16 संस्कार बताए गए हैं लेकिन बहुत कम ही लोग इन 16 संस्कारों के बारे में जानते हैं। 
आज हम इन्हीं संस्कारों के बारे में बताएंगे जिनका वर्णन नारद पुराण में किया गया है। और अभी बताएंगे कि इन संस्कारों का इतना धार्मिक महत्व क्यों है। पुराने समय में हमारे राजा महाराजा इन संस्कारों का पालन बहुत ही अच्छी तरह से करते थे । जिस कारण उनकी संताने बहुत ही सुंदर, तेजस्वी, बलवान होते थे। और आगे चलकर राज्य को एक सुयोग्य उत्तराधिकारी मिलता था। जब से पश्चिमी सभ्यता हमारे ऊपर थोपी गई, तब से धीरे-धीरे करके हम अपने रीति रिवाजों , को जो हमारे पुराणों, एवं महा पुराणों में दिए गए हैं उनको भूलते जा रहे हैं । 

इस कारण हमारी संतानों में वह क्षमता नहीं मिल रही है। आज हमें अपने धर्म संस्कृति के तरफ वापस लौटने की आवश्यकता है । यदि आज भी हम अपने संतानों में पुराने समय के राजा महाराजा जैसी रूप गुण और तेज देखना चाहते हैं, तो हमें इसके लिए नारद पुराण मैं वर्णित 16 संस्कारों का पालन करना बहुत ही जरूरी है। मित्रों आप सभी का हमारे वेबसाइट हिंदी वर्ल्ड में स्वागत है। 

नंबर एक गर्भाधान संस्कार 
सभी संस्कारों में गर्भाधान संस्कार प्रथम संस्कार है यहीं से शिशु का निर्माण होता है , गृहस्थ आश्रम में प्रवेश करने के पश्चात एक दंपति को संतान उत्पत्ति का मान्यता प्रदान की गई है। इसीलिए शास्त्र में कहा गया है उत्तम संतान प्राप्त करने के लिए गर्भाधान संस्कार करना बहुत ही जरूरी है। माता-पिता के रज एवं वीर से ही संतान उत्पत्ति होती है। गर्भाधान जीव का प्रथम उत्पत्ति है जीव इस समय माता के गर्भ में प्रवेश करता है जो पहले से ही पुरुष के वीर्य में विद्यमान रहता है। संभोग के पश्चात वह नारी के रज से मिलकर डिम्ब में प्रवेश करता है और विकास प्राप्त करता है। दांपत्य जीवन का सर्वश्रेष्ठ उद्देश्य श्रेष्ठ गुणों वाले तेजस्वी, चरित्रवान और यशस्वी संतान प्राप्त करना है। मित्रों शास्त्र के अनुसार यह संस्कार सूर्यास्त के पश्चात दक्षिण के तरफ मुख करके करना चाहिए। मित्रों गर्भाधान संस्कार से पहले पुरुष को कम से कम 2 माह पहले से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए, इस संस्कार वाले दिन बड़े बुजुर्गों और अपने कुल देवता का आशीर्वाद देना अनिवार्य बताया गया है। 

नंबर दो पुंसवन संस्कार 
मित्रों यह संस्कार गर्भधारण के तीसरे महीने किया जाता है।


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